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Saturday, October 30, 2010

बहुत बड़ा है सुरों का कुनबा

अपने 60 घंटे की सितार बजाने की यात्रा को पूरा करने निकले सुरमणि अग्नि वर्मा होटल के एक छोटे से कमरे में जब सितार बजाते-बजाते मदमाती मुस्कान से लोगों का स्वागत करते हैं तो लगता है कि इन्हें और ऊंचा लक्ष्य लेना चाहिए था। सुरमणि वर्मा ने टोरंटो निवासी शंभू दास का 24 घंटे का रिकार्ड तो तोड़ा ही साथ ही लगातार 60 घंटा सितार बजाने का नया रिर्काड भी कायम किया। मसूरी इंटरनेशनल स्कूल में सितार वादन के शिक्षक सुरमणि एक साधारण परंतु असाधारण इंसान हैं पत्नि व दोनों बच्चे भी सितार में माहिर हैं सितार के तारों से कट चुकी अंगुली कब तार से छूटेगी और कैसे जल्दी से उस अंगुली के घाव में तेल लगेगा यह उनकी जीवन संगिनी से बेहतर कौन जान सकता है। जिन चुनौतियों को झेलते हुए उन्होंने 60 घंटे का सितार वादन समाप्त किया इसमें उनके परिवार व दोस्तों सब का सहयोग रहा। बीच-बीच में सितार प्रेमी उन्हें बल देते रहे। अग्नि वर्मा के संगीत के सफर की शुरूआत विश्वविख्यात बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया के गुरू रहे स्व। राजाराम जायसवाल से संगीत की शिक्षा ग्रहण करने के साथ हुई। अग्नि वर्मा को संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार, प्रयाग गौरव, महर्षि सम्मान व सुरमणि जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। संगीत के बारे में बताते हैं कि हजार फूलों से निकले शहद की तरह है संगीत। यह वह रस है जो कभी दूषित नहीं हो सकता। कहने को तो सात ही सुर हैं पर बहुत बड़ा है सुरों का कुनबा। पूछने पर कि संगीत कुछ घरानों तक ही सिमट कर क्यों रह जाता है क्यों नहीं पहुंच पाता वह आम जन तक। कहते हैं कि संगीत को जन-जन तक ले जाने का काम वही कर सकता है जिसका पेट भरा हो। स्टेज से नीचे उतरते हैं तो याद आ जाता है कि अरे सितार का तार टूटा है उसकी मरम्मत भी करनी है। घर जाना है वहां घर परिवार है। कलाकारों की अगर दो रोटी की जुगत हो जाए तो क्रांति हो सकती है कला के क्षेत्र में। फिर घराने कभी नहीं चाहते कि कला आम जन तक पहुंचे। वो तो उसमें अपना पेटेंट चाहते हैं। आज तो गुरू-शिष्य की पंरपरा भी दूषित हो गई है मैं अपनी लड़की को संगीत की शिक्षा लेने घरानों में कभी नहीं भेज सकता क्योंकि मैंने करीब से वहां के माहौल को देखा है। मैं तो कहता हूं कि मिडिल क्लास को कभी संगीत की शिक्षा नहीं लेनी चाहिए या तो आपके पास खूब पैसा हो या फिर आप फकीर हों तब ठीक है वरना संगीत आपको फकीर बना के छोड़ेगा। संगीतकार खय्याम कहते हैं कि संगीत तो जन से ही निकला शायद मां के बच्चे को थपथपाने से धुन निकली होंगी। शायद पशुओं के चरने व रंभाने, कुलांचे भरने से कोई नये स्वर का निर्माण हुआ होगा और फिर उसी को परिष्कृत कर शास्त्रीय संगीत का जन्म हुआ होगा।

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